मैंने शाम गुज़रते देखा हैं।एक जगह बैठे उसे रात, फिर दिन,और फिर वापिस आते देखा हैंउसे असाढ़ में तपते, माघ में ठिठुरतेतो सावन में झूमते देखा है।कभी जुगनू जैसा चमकते,काली स्याही में बदलते,कभी सतरंगो से भरे तो, कभीनीले रंग में सफेद को घुलते देखा है।उसे ठहरते देखा हैनन्हे परिंदों संग ओझल होते देखा हैउनके पंखों संग खेलते देखा हैमैंने शाम...... को गुज़रते देखा है।चबुतरे पर लेट के,कमरे की किवाड़ों से झाँकते,छज्जे पर बैठ के, तो कभीखुले मैदानों में दौड़ते देखा है।गाँव के सुकूँ में देखा है,शहर की चकाचौंध मे देखा है,घाट किनारे बैठ कर देखा हैंसमंदर की रेत जैसे भीगते देखा हैं।बचपन में उससे रेस लगाने से,जवानी में उस से हारते देखा हैदोस्तो के साथ देखा है, उनके बाद देखा है।खुली आँखों से देखा हैमूंद कर उनपर बसते देखा हैमैंने शाम में..... ज़िंदगी को गुज़रते देखा हैकिसी का हाथ पकड़ चलते ,तो उस हाथ के न होने पर रोते देखा हैअकेले पन के मायूसी में,तो दिल भर आये खामोशी में देखा हैमस्त मौला मग्न झूमतेतो संग गुनगुनाते देखा है।तुम्हारे साथ उसे रोते देखा हैतुम्हारे साथ उसे खोते देखा हैंसंग कई शामो को गुज़ारने से लेकर,उन शामो को अपना बनाते देखा हैमैंने तुम्हें...... शाम को रोकते देखा है।बंगले के आलिशान बालकॉनी से,टिन से ढकी झोपड़ी से,किसी को उसे पूजते,तो किसी को उससे जूझते देखा है ।मैंने शाम तले,दो दुनिया को बसते देखा हैं।उस संग आशाओं को मारते देखा है,उस संग सपनों को संजोते देखा है,मैंने शाम की सच्चाइयों को देखा है,उसे निर्दयी होते, मरती परछाइयों को देखा है।मैंने शाम रहते...... लोगो को गुज़रते देखा है।शाम को खास से आम बनते देखा हैकहने वालों के किस्सों से खोते देखा हैलिखने वालों को उसे मिटाते देखा हैशाम से जुड़े रिश्तों को टूटते देखा है।कभी शाम को अकेला देखा करता था,आज उसे अकेले होते देखा है।परिंदो को उससे मुँह मोड़ते देखा हैशाम के सुकूँ को शोर बनते देखा हैउसमे अपनी जीत को देखा करता था,आज खुद सा बेबस होते देखा हैं।यादों से बाहर निकल के,उसे सच्चाई को घूँटते देखा है।गहरे काले अंधेरे में समाते देखा है।कभी अज़ाद हुआ करता थाअब फंदे में लिपटते देखा है।मैंने आज...... शाम को मरते देखा है।
Monday, May 25, 2020
शाम का शोर
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