मेरा जन्म झारखंड के पलामू जिले के सदर अस्पताल मे हुआ था। कुछ महीनों बाद पिताजी की नौकरी की वजह से हम फ़रीदाबाद आ गए, लोग कहते हैं मैंने चलना वहीं पर सीखा था। उसके बाद पिताजी का तबादला हुआ तो पहले टुंडला और फिर कानपुर और आज कल मैं दिल्ली में रहने लगा हूँ।
इन जगहों में कुछ महीनों से लेकर सालो तक रहने के बाद जब कोई मुझसे ये पूछता हैं कि मैं कहाँ का रहने वाला हूँ, तब कुछ समय के लिए मै एक अलग ही दुविधा में घिर जाता हूँ और ख़ुद से पूछने के लिए बाध्य हो जाता हूँ कि मैं कहाँ का रहने वाला हूँ?
इसका उत्तर अगर समाज के कुछ नियमों को ध्यान मे रख कर दिया जाए तो उत्तर झट से आपकी झोली में होगा, पर अगर उन नियमों को किनारे कर के सोचे तो इस प्रश्न का उत्तर तब तक बदलता रहेगा जब तक आप स्थायी रूप से स्थिर नहीं हो जाते।
जी, तो उन नियमों के अनुसार मैं झारखंड का हुआ, लेकिन मुझे तो झारखंड की मीठी बोली से लेकर हरियाणा के तौर तरीके भी आते हैं, मैं टुंडला की पतली गालियों से लेकर दिल्ली की ऊँची इमारतों में भी रहा हूँ। देखा जाए तो मैंने अपनी जन्मभूमि से ज़्यादा वक़्त बाकी शहरों में बिताया है और सच पूछो तो मुझे याद भी नहीं कि उस वक़्त का झारखंड कैसा था। फिर मैं झारखंड के कैसे हुआ?
ऐसे तो ये प्रश्न की आप कहाँ के रहने वाले हो मुझ पर लागू ही नहीं होता और अगर होता हैं तो मुझे खुली झूट है किसी भी जगह का नाम लेने की, शायद इसही लिए मेरे आस पास के कुछ लोगो को लगता हैं कि मैं झारखंड का हूँ तो कुछ को की कानपुर का।
टुंडला और फ़रीदाबाद के बारे में काफियों को नही पता हैं।
आजकल मैं लोगो को अब ये ही बताता हूँ कि दिल्ली का हूँ ताकि उसके आगे पूछे जाने वाले प्रश्नों से बच सकूँ, शायद आने वाले सालों में मेरी पहचान और भी ज़्यादा लंबी होती जाएगी।
सच पूछो तो अपने गाँव जाकर वहाँ का बनने में मुझे ज़रा सा भी वक़्त नहीं लगता। वही शाम का जमावड़ा, भोर भोर उठ जाना, मोबाइल जैसी दुनिया से कोसो दूर चले जाना, कंधे पर गमझा लेकर हर छोटे बड़े कस्बे में चक्कर लगाना और खेतों में ही सो जाना, ये सब मेरे लिए उतना ही अपना हैं जितना शहर में आकर पूरा इसका विपरित हो जाना।
फिर मैं गाँव का कहलाऊँगा या शहर का, क्योंकि मेरे अंदर गाँव जैसी सादगी बस्ती है तो शहर में रहने का झुझारू स्वभाव भी आ ही गया है।
शायद मैं अनायास ही इतना सोच रहा हूँ, मुझे वहीं करना चाहिए जो करता आया हूँ।
जी तो,
नमस्कार मेरा नाम अनिमेष पांडेय हैं, मेरा जन्म झारखंड में हुआ था पर मेरी बारहवीं तक कि शिक्षा कानपुर से हुई हैं, स्नातक के लिए मैं दिल्ली आ गया और आगे की शिक्षा मैंने फलाने फलाने जगह से ली है और नौकरी......... और घर.......... और ..............
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