Saturday, June 27, 2020

क्या किया जाए

 

क्यों इस बारे मे लिखा जाए कि,"किस बारे मे लिखा जाए?"

सत्ता, सहेली, या शाम,

खेल, खिलौना, खाली जाम,

घर के चार दीवारों में कैद ज़िंदगी,

या घोसले में जन्मे नई उड़ान|

कविता, किस्सा या कहनी,

चलते मुसाफिर, बहता पानी,

खेलते मासूम बच्चे या भार ढोती जवानी|

कहिए, किस बारे में लिखा जाए?

 

क्यों इस बारे में लिखा जाए कि, लिखने कुछ और बैठे थे लिखने कुछ और लगे,

सोचा कविता लिखेंगे, कहानी गढ़ने लगे|

एक किताब लिखने की बात थी, पन्ने फटने लगे|

किस्से की शुरुआत को छोड़, अंत को सोचने लगे।

मुसाफिर का सोच था, राह संग घुलने लगे।

बरसों का मोल, एक पल से करने लगे

एक लेखक की तरह लिखने बैठे थे,

ज़िंदगी की तरह भटकने लगें।

कहिए, अब क्या किया जाए।

 

क्यों इस बारे में लिखा जाए कि कहाँ बैठकर, किस वक़्त लिखा जाए

किसी को चार दिवारी पसंद आए|

किसी को घाट किनारा घसीट ले जाए|

कोई राह चलते कलम चलाए,

तो बस, कोई बातें कहते जाए

किसी को हर वक़्त शाम नज़र आए

तो कोई किस्सो से शाम बना जाए

तो कहिए, कहाँ बसेरा लगाया जाए।

 

 

क्यों इस बारे में लिखा जाए कि लिखने की प्रेरणा कहाँ से लाए।

ज़िंदगी के पशोपेश को टटोला जाए

या मरने के सत्य को कहा जाए।

कभी फुटपाथ पर सोये को देख कलम चल जाए

जो, करोड़ो का मकान दे पाए।

अपने अंतर मन से पूछा जाए,

तो कभी दूसरों के बेबाक अंदाज़ से मोह हो जाए|

दुविधा बस इतनी सी हैं कि प्रेरणा कहाँ से ली जाए

तो फिर,

क्यों इस बारे में लिखा जाए कि..........छोड़िए न|

मैं कहता हूँ,

क्यों बस लिखा जाए,

फिर चाहे वो मन मे आया छोटा खयाल ही सही

या सत्ता हिलाने वाला बड़ा सवाल ही सही।

क्यों , बिना कुछ सोचे समझे ख़यालो को पन्नो तक पहुँचाया जाए

क्यों ,हर हालात, हर ज़ज्बात, हर इशारे, हर इंसान उसकी परछाई, उसके मन को छुआ जाए।

क्यों कोरे कागज़ों पर स्याही बिखेरी जाए

और

क्यों बस........लिखा जाए।

11 comments:

  1. क्यों ना जो देखे , उसे लिखते-लिखते समझा जाये....
    सराहनीय🌸

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  2. क्यों न उन्हें अब अपनी महफ़िल से बेदखल किया जाए ।
    क्यों न अब उनके जैसा नकल किया जाए।।
    गीत,ग़ज़ल,गानों,के सहारे ही सही
    झूठ ही सही क्या पता उनसे बात करने की वजह मिल जाये।।
    अनिमेष भैया से प्रेरित आपका छोटा भाई सिद्धार्थ कनोजिया।

    आपके लेख से सदैव कुछ नया ,अपनी मिट्टी का महत्व समझने को मिलता है आपका आभार।

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  3. Kyu na ek sawaal ye kiya jaaye ki akhir likha hi kyu jaaye
    Akhbaaro ke liye? Sawaalo ke liye? Ya khud ko tarashne ke liye
    Kyuki likhna ab kisi khazaane se kam nhi lagne lag gaya
    Chalo apne mann ko hi tatol lete hai, shayad kuch likhne ko mil jaaye

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  4. क्यों न इस लेखक को सरहाया जाये
    बहुत ही उम्दा पांडे जी ❤️

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