न जाने ये कैसी आहट हैं जो मुझे सोने नहीं दे रही,
मुझे डर लग रहा हैं इस आहट से।
वैसा डर जो ऊचाइयों पर खड़े होकर ज़मीन की ओर देखने से होता हैं,
मैं अपने शरीर की गर्मी को महसूस कर पा रहा हूँ।
ऐसा लग रहा है मानो मै आग के सामने खड़ा हूँ और उसकी तेज़ लपटे सीधा मेरे चेहरे पर पड़ रही हैं।
इस आहट ने मेरी इस रात को असहनीय बना दिया हैं,
लगता हैं मुझे सो जाना चाहिए , पर ये कोशिश तो मै पिछले कई घंटों से कर रहा हूँ।
क्या मुझे दरवाज़ा खोल कर एक बार देख लेना चाहिए कि कोन हैं
या मुझे खुद को रोक लेना चाहिए ?
मुझे डर और उत्तेजना दोनो ने घेर रखा हैं कि, ये आहट मुझसे दोस्ती करना चाहती हैं या मुझे नुक्सान पहुँचाने आई हैं?
मैं हताश हूँ और अपनी इस बुज़दिली से नाराज़ भी,
कितना कमज़ोर महसूस कर रहा हूँ मैं इसके आगे।
मुझे लगता हैं मुझे हार मान लेनी चाहिए ये लड़ाई मेरे बस की नहीं, या यूं कहो कि मैं इस लड़ाई के लिए बना ही नहीं।
धिक्कार हैं मुझ जैसे इंसान पर जो अपने मन मैं इस आहट के लिए डर बना कर बैठा हैं और इससे हार चुका हैं।
मुझे नहीं लगता मैं इस ग्लानि के साथ जी भी पाउँगा की मैं खुद को ये लड़ाई जीता नहीं पाया। ओह! माफ करना शायद मैं गलत बोल गया, की मैं इस ग्लानि के साथ जी भी पाउँगा की मैं लड़ने की कोशिश नहीं कर पाया
सुनो, तुम मेरे साथ मत रहना, मैं तुम्हे भी एक हारा हुआ इंसान बना दूँगा।
मुझे डर लग रहा हैं इस आहट से।
वैसा डर जो ऊचाइयों पर खड़े होकर ज़मीन की ओर देखने से होता हैं,
मैं अपने शरीर की गर्मी को महसूस कर पा रहा हूँ।
ऐसा लग रहा है मानो मै आग के सामने खड़ा हूँ और उसकी तेज़ लपटे सीधा मेरे चेहरे पर पड़ रही हैं।
इस आहट ने मेरी इस रात को असहनीय बना दिया हैं,
लगता हैं मुझे सो जाना चाहिए , पर ये कोशिश तो मै पिछले कई घंटों से कर रहा हूँ।
क्या मुझे दरवाज़ा खोल कर एक बार देख लेना चाहिए कि कोन हैं
या मुझे खुद को रोक लेना चाहिए ?
मुझे डर और उत्तेजना दोनो ने घेर रखा हैं कि, ये आहट मुझसे दोस्ती करना चाहती हैं या मुझे नुक्सान पहुँचाने आई हैं?
मैं हताश हूँ और अपनी इस बुज़दिली से नाराज़ भी,
कितना कमज़ोर महसूस कर रहा हूँ मैं इसके आगे।
मुझे लगता हैं मुझे हार मान लेनी चाहिए ये लड़ाई मेरे बस की नहीं, या यूं कहो कि मैं इस लड़ाई के लिए बना ही नहीं।
धिक्कार हैं मुझ जैसे इंसान पर जो अपने मन मैं इस आहट के लिए डर बना कर बैठा हैं और इससे हार चुका हैं।
मुझे नहीं लगता मैं इस ग्लानि के साथ जी भी पाउँगा की मैं खुद को ये लड़ाई जीता नहीं पाया। ओह! माफ करना शायद मैं गलत बोल गया, की मैं इस ग्लानि के साथ जी भी पाउँगा की मैं लड़ने की कोशिश नहीं कर पाया
सुनो, तुम मेरे साथ मत रहना, मैं तुम्हे भी एक हारा हुआ इंसान बना दूँगा।
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